Friday, 12 October 2012

मन की बातें ...





कुछ सरसराहट है हवाओं में ,कुछ ओस की नमी भी हैं ..
मौसम ने करवट बदली है ..गर्म हवाएं थमी भी हैं ..
सुनहरी धुप से सुनहरा हैआज कल कमरे में नूर ..
इस ठंडक में आबो हवा ही नहीं...ज़मी भी है ..

8 Comments:

At 13 October 2012 at 00:26 , Blogger "अनंत" अरुन शर्मा said...

सुन्दर रचना

 
At 13 October 2012 at 01:16 , Blogger Dheerendra singh Bhadauriya said...

बेहतरीन मुक्तक,,,
ऋतू जी,,,कभी तो मेरे पोस्ट पर आइये स्वागत है,,,

MY RECENT POST: माँ,,,

 
At 13 October 2012 at 07:10 , Blogger रविकर said...

बहुत बढ़िया |
बधाई ||

 
At 14 October 2012 at 10:49 , Blogger चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

वाह!
आपकी इस ख़ूबसूरत प्रविष्टि को कल दिनांक 15-10-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1033 पर लिंक किया जा रहा है। सादर सूचनार्थ

 
At 15 October 2012 at 03:11 , Blogger सदा said...

वाह ... बेहतरीन

 
At 15 October 2012 at 11:07 , Blogger Virendra Kumar Sharma said...

बहुत खूब !बहुत खूब !बहुत खूब !






कुछ सरसराहट है हवाओं में ,कुछ ओस की नमी भी हैं ..(है )......है
मौसम ने करवट बदली है ..गर्म हवाएं थमी भी हैं ..
सुनहरी धुप से सुनहरा हैआज कल कमरे में नूर ..धुप .....धुप ...
इस ठंडक में आबो हवा ही नहीं...ज़मी भी है ..

ram ram bhai
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सोमवार, 15 अक्तूबर 2012
भ्रष्टों की सरकार भजमन हरी हरी ., भली करें करतार भजमन हरी हरी .

 
At 9 November 2012 at 02:17 , Blogger ZEAL said...

lovely..

 
At 5 December 2012 at 01:09 , Blogger Madan Mohan Saxena said...

This comment has been removed by the author.

 

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