Friday, 12 October 2012

मन की बातें ...





कुछ सरसराहट है हवाओं में ,कुछ ओस की नमी भी हैं ..
मौसम ने करवट बदली है ..गर्म हवाएं थमी भी हैं ..
सुनहरी धुप से सुनहरा हैआज कल कमरे में नूर ..
इस ठंडक में आबो हवा ही नहीं...ज़मी भी है ..

8 comments:

  1. बेहतरीन मुक्तक,,,
    ऋतू जी,,,कभी तो मेरे पोस्ट पर आइये स्वागत है,,,

    MY RECENT POST: माँ,,,

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  2. बहुत बढ़िया |
    बधाई ||

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  3. वाह!
    आपकी इस ख़ूबसूरत प्रविष्टि को कल दिनांक 15-10-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1033 पर लिंक किया जा रहा है। सादर सूचनार्थ

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  4. वाह ... बेहतरीन

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  5. बहुत खूब !बहुत खूब !बहुत खूब !






    कुछ सरसराहट है हवाओं में ,कुछ ओस की नमी भी हैं ..(है )......है
    मौसम ने करवट बदली है ..गर्म हवाएं थमी भी हैं ..
    सुनहरी धुप से सुनहरा हैआज कल कमरे में नूर ..धुप .....धुप ...
    इस ठंडक में आबो हवा ही नहीं...ज़मी भी है ..

    ram ram bhai
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    सोमवार, 15 अक्तूबर 2012
    भ्रष्टों की सरकार भजमन हरी हरी ., भली करें करतार भजमन हरी हरी .

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  6. This comment has been removed by the author.

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