Wednesday, 15 February 2012

मन की गगरी

मन की गगरी कभी तो छलकेगी
जब तन हिंडोले खायेगा
नैनो की सगरी कभी तो छलकेगी
जब मुख 'बरबस' मुस्काएगा
किये जतन मैंने लाख ,के पगडण्डी न छोडूँ
किये जतन मैंने लाख पीड़ा में मुख न खोलूँ
पर बेबस मन कभी तो हठ पर आएगा
जब मन की गागर ,तन की सागर
संग लहरों में गोता खायेगा
वो बैठी बुलबुल ,नित मुझको समझा रही
क्यों मैं भावों में बह ,अपने ही को हरा रही
ऐ! बुलबुल तेरा जतन काम आएगा
मेरा मन तन पर काबू पायेगा
सच के हिंडोलों पे
झूठ कभी न आएगा
गूंजेगा मन ,
तन अब न गागर छल्कायेगा
(चित्र गूगल से )

17 comments:

  1. मेरा मन तन पर काबू पायेगा
    सच के हिंडोलों पे
    झूठ कभी न आएगा
    गूंजेगा मन ,
    तन अब न गागर छल्कायेगा

    बेहतरीन पंक्तियाँ
    Life is Just a Life
    My Clicks

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  2. bahut sundar bhaav badhia rachna.

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  3. बेहतरीन पंक्तियाँ

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  4. गहरे भाव लिए सुंदर रचना।

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

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  6. किये जतन मैंने लाख ,के पगडण्डी न छोडूँ
    किये जतन मैंने लाख पीड़ा में मुख न खोलूँ
    पर बेबस मन कभी तो हठ पर आएगा
    जब मन की गागर ,तन की सागर
    संग लहरों में गोता खायेगा ...

    बहुत सुन्दर...

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  7. अनुपम भाव संयोजन के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  8. बहुत बेहतरीन....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  9. बहुत बेहतरीन....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  10. भावों को छलकने दो
    मन को मचलने दो
    यही तो है ऋतु सखी
    तन मन महकने दो ।

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  11. पर बेबस मन कभी तो हठ पर आएगा
    जब मन की गागर ,तन की सागर
    संग लहरों में गोता खायेगा ...
    बहुत खूब ... मन पर कभी कभी कोई बस नहीं रहता और गागरी छलक जाती है ... लाजवाब ...

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    1. बहुत सुन्दर सृजन , बधाई.

      मेरे ब्लॉग"meri kavitayen" की नवीनतम पोस्ट पर आप सादर आमंत्रित हैं.

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  12. सुन्दर भावमय प्रस्तुति.
    अच्छा लगा पढकर.

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  13. सच के हिंडोलों पे
    झूठ कभी न आएगा
    गूंजेगा मन ,
    तन अब न गागर छल्कायेगा...

    लाजबाब प्रस्तुति बढ़िया रचना,....

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  14. मन की गगरी कभी तो छलकेगी .......
    sundar bhav aabhar

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