Saturday, 11 February 2012

ज़िन्दगी जी ले..

सुख को शहद में घोल तू पी ले 
चार दिन ज़िन्दगी ,जी भर के जी ले 
दुःख क्या है  मत सोच
मन में ग़मों को उतार ,
ज़िन्दगी जी ले
प्यार का बना के शरबत तू पी ले
ये उम्र बीती जाए ,जी भर के जी ले
नफरत क्या है मत सोच
मन से रंजो को उतार
ज़िन्दगी जी ले
अपनेपन की चाशनी तू घोले
मिला ले उसमे सुख और प्यार तू पी ले
क्या रह गया मत सोच
जीवन अमृतवर्षा तू जान ,
ज़िन्दगी जी ले..

13 comments:

  1. एकदम नेक सलाह :-) जिंदगी जी ले...

    सुन्दर भाव, सुन्दर रचना..

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  2. बहुत सार्थक और सकारात्मक सोच...सुंदर प्रस्तुति..

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  3. जिंदगी चार दिन की..... क्‍या किसी से गिला क्‍या शिकवा।
    सलाह सर आंखों पर.....

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  4. jibhar kar ji lo... kya pata kal ho na ho. sandeshprad rachna ke liye badhai....shubhkaamnaayen.

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 13-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  6. सकारात्मक सोच की बानगी है आपकी रचना ....बहुत उम्दा

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  7. बहुत खूब लिखा है |
    आशा

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  8. ek ptar se bhara pyari si kavita...badhiya

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  9. संवेदनशील मुखर रचना ..... बधाईयाँ जी /

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