Saturday, 4 February 2012

कुछ और है .


उड़ते परिंदों का जहां कहीं और है
उनकी ज़मीं आसमां कहीं और है
 महलों दुमहलों की उनको ज़रुरत नहीं
उनका आशियाना कहीं और है


 

         झुकते बादलों का ठिकाना कहीं और है                                           उनका किस्सा फ़साना कहीं और 
  ऊँचे पर्वतों की उन्हें ज़रुरत नहीं
    उनका हवाओं से याराना कुछ और है

              
बहते झरनों का तराना कुछ और है
उनकी रागिनी, गाना कुछ और है
राहे पत्थरों की उनको परवाह नहीं
मंजिल ऐ मुकां, का बहाना कुछ और है .



राह के इस पथिक का दीवाना कहीं  और है
उसकी हस्ती उसका ज़माना कहीं  और है
 इस दीवानगी में दवा की ज़रुरत नहीं
खोया शब्दों में ,पर उसको जाना कहीं और है 




(चित्र गूगल  से लिए हैं )

22 Comments:

At 4 February 2012 at 22:01 , Blogger रश्मि प्रभा... said...

राह के इस पथिक का दीवाना कहीं और है
उसकी हस्ती उसका ज़माना कहीं और है
इस दीवानगी में दवा की ज़रुरत नहीं
खोया शब्दों में ,पर उसको जाना कहीं और है... waah

 
At 4 February 2012 at 22:27 , Blogger P.N. Subramanian said...

Bahut sunder. Aapki rachna bhi Kuch aur hi hai.

 
At 5 February 2012 at 01:39 , Blogger डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"(Dr.Rajendra Tela,Nirantar)" said...

jisko chaahtaa hai dil
miltaa kahaan?
wo rahtaa hai kahin aur
bahut ++++++

 
At 5 February 2012 at 01:46 , Blogger यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

राह के इस पथिक का दीवाना कहीं और है
उसकी हस्ती उसका ज़माना कहीं और है
इस दीवानगी में दवा की ज़रुरत नहीं
खोया शब्दों में ,पर उसको जाना कहीं और है

बेहतरीन पंक्तियाँ।

सादर

 
At 5 February 2012 at 06:02 , Blogger Reena Maurya said...

वाह,,
सुन्दर प्रस्तुति
बेहतरीन रचना

 
At 5 February 2012 at 08:37 , Blogger sangita said...

उड़ते परिंदों का जहां कहीं और है
उनकी ज़मीं आसमां कहीं और है
महलों दुमहलों की उनको ज़रुरत नहीं
उनका आशियाना कहीं और है
बेहतरीन पंक्तियाँ।

 
At 5 February 2012 at 09:00 , Blogger चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति
आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 06-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

 
At 5 February 2012 at 09:49 , Blogger चन्दन भारत said...

बेहतरीन....
बहुत हि सुन्दर शब्द संचयन...

 
At 5 February 2012 at 15:55 , Blogger डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

खोया शब्दों में ,पर उसको जाना कहीं और है.....

Behtreen...

 
At 5 February 2012 at 17:34 , Blogger Asha Saxena said...

बहुत गहरा सोच है |अच्छी रचना |बहुत बहुत बधाई |
आशा

 
At 5 February 2012 at 20:05 , Blogger vidya said...

झुकते बादलों का ठिकाना कहीं और है
उनका किस्सा फ़साना कहीं और
ऊँचे पर्वतों की उन्हें ज़रुरत नहीं
उनका हवाओं से याराना कुछ और है

बहुत बढ़िया रचना...
बधाई.

 
At 5 February 2012 at 22:35 , Blogger अरूण साथी said...

राह के इस पथिक का दीवाना कहीं और है
उसकी हस्ती उसका ज़माना कहीं और है



साधु-साधु

 
At 5 February 2012 at 22:36 , Blogger अरूण साथी said...

साधु-साधु

 
At 6 February 2012 at 02:21 , Blogger Suman said...

राह के इस पथिक का दीवाना कहीं और है
उसकी हस्ती उसका ज़माना कहीं और है
इस दीवानगी में दवा की ज़रुरत नहीं
खोया शब्दों में ,पर उसको जाना कहीं और है
badhiya rachna sundar lagi ....

 
At 6 February 2012 at 02:23 , Blogger Suman said...

राह के इस पथिक का दीवाना कहीं और है
उसकी हस्ती उसका ज़माना कहीं और है
इस दीवानगी में दवा की ज़रुरत नहीं
खोया शब्दों में ,पर उसको जाना कहीं और है
badhiya rachna sundar lagi ....

 
At 6 February 2012 at 03:34 , Blogger Akhil said...

waah..prakarti ki sundarta ko khoobsurat shabdon men sajaya hai aapne...

 
At 6 February 2012 at 03:57 , Blogger Anita said...

बहुत सुंदर भाव और शब्द !

 
At 6 February 2012 at 08:57 , Blogger Sunil Kumar said...

बहुत सुंदर भाव संजोये है और उनकी अभिव्यक्ति भी बहुत सुंदर क्या बात है .....

 
At 6 February 2012 at 08:58 , Blogger Naveen Mani Tripathi said...

इस दीवानगी में दवा की ज़रुरत नहीं
खोया शब्दों में ,पर उसको जाना कहीं और है

bahut hi sundar ritu ji ...badhai.

 
At 6 February 2012 at 19:04 , Blogger संजय कुमार चौरसिया said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

 
At 6 February 2012 at 20:22 , Blogger हास्य-व्यंग्य का रंग गोपाल तिवारी के संग said...

उड़ते परिंदों का जहां कहीं और है
उनकी ज़मीं आसमां कहीं और है
महलों दुमहलों की उनको ज़रुरत नहीं
उनका आशियाना कहीं और है
Bahut khoob

 
At 6 February 2012 at 21:32 , Blogger G.N.SHAW said...

बिलकुल सही चित्रण ! काश हम सभी इसी खयालो के होते तो यह मारा-मारी नहीं होती !बधाई

 

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