Thursday, 6 September 2012


उलझन


यादों के धूमिल पलछिन को 

वादों के गिनगिन उन दिन को 
प्यार भरे उन अफ्सानो को 
मैं भूलूँ  या न भूलूँ  

संग उनके बिखरे सपनों को
 कुछ गैरों  को कुछ अपनों को 
शत्रंजों की उन चालों को 
मैं खेलूँ या न खेलूँ 

 जो जब चाहा मौन रहा 
जिसने जब चाह 'गौण' कहा
उनके डगमग हिंडोलों में 
मैं झूलूँ  या न झूलूँ 

ऊंचा उड़ने की ख्वाइश है 
रब से कुछ फरमाइश हैं
इन्द्रधनुष ,गगन में उड़के
मैं छु लूं या न छु लूं 


दिल कहता है भर जायेंगी 
आशाएं अब घर आयेंगी 
मन की उन हसरतों को
 मैं पा लूं या न पा लूं .

(चित्र  गूगल से है )

18 Comments:

At 6 September 2012 at 23:33 , Blogger yashoda agrawal said...

आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार साक्षरता दिवस 08/09/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

 
At 6 September 2012 at 23:59 , Blogger Vinay Prajapati said...

बेहतरीन रचना :)

---
हिंदी टायपिंग टूल हमेशा रखें कमेंट बॉक्स के पास

 
At 7 September 2012 at 01:01 , Blogger ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

प्यारी रचना | सुन्दर भाव |

 
At 7 September 2012 at 01:10 , Blogger शिवम् मिश्रा said...

वाह बहुत खूब ...

मुझ से मत जलो - ब्लॉग बुलेटिन ब्लॉग जगत मे क्या चल रहा है उस को ब्लॉग जगत की पोस्टों के माध्यम से ही आप तक हम पहुँचते है ... आज आपकी यह पोस्ट भी इस प्रयास मे हमारा साथ दे रही है ... आपको सादर आभार !

 
At 7 September 2012 at 02:17 , Blogger HARSHVARDHAN SRIVASTAV said...

बहुत सुन्दर पोस्ट। एक बार मेरी नयी पोस्ट -"क्या आप इंटरनेट पर ऐसे मशहूर होना चाहते है?" पर भी आप अपनी दृष्टि अवश्य डाले । धन्यवाद

मेरा ब्लॉग पता है - harshprachar.blogspot.com

 
At 7 September 2012 at 02:20 , Blogger रवीन्द्र प्रभात said...

एक और बेहतरीन रचना के लिए बधाइयाँ !

 
At 7 September 2012 at 03:16 , Blogger सदा said...

दिल कहता है भर जायेंगी
आशाएं अब घर आयेंगी
मन की उन हसरतों को
मैं पा लूं या न पा लूं .
वाह ... बहुत बढिया प्रस्‍तुति।

 
At 7 September 2012 at 04:55 , Blogger expression said...

जो दिल कहे वही करें....असमंजस में न रहें...

सुन्दर रचना रितु...

अनु

 
At 7 September 2012 at 05:45 , Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (08-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

 
At 7 September 2012 at 06:37 , Blogger दिगम्बर नासवा said...

Man ki uljhan ko sarthak shabd diye hain ....lajawab prastuti ...

 
At 7 September 2012 at 06:55 , Blogger Anupama Tripathi said...

asha sanjoy rakhen ...
sundar rachna ...!!

 
At 7 September 2012 at 11:07 , Blogger dheerendra said...

बहुत बढ़िया बेहतरीन रचना ,,,,

RECENT POST,तुम जो मुस्करा दो,

 
At 7 September 2012 at 21:17 , Blogger सुशील said...

खूबसूरत रचना !

 
At 7 September 2012 at 22:21 , Blogger संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

जो जब चाहा मौन रहा
जिसने जब चाह 'गौण' कहा
उनके डगमग हिंडोलों में
मैं झूलूँ या न झूलूँ

खूबसूरती से एहसास को पिरोया है ।

 
At 7 September 2012 at 22:26 , Blogger यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत ही बढ़िया

सादर

 
At 8 September 2012 at 00:09 , Blogger Dr. sandhya tiwari said...

bahut sundar rachna ............hamesha apne dil ki sunni chahiye

 
At 10 September 2012 at 04:07 , Blogger raju said...

बहुत ही सरल और बहुत ही बढ़िया.मज़ा आ गया.

 
At 27 October 2012 at 01:05 , Blogger भावना पाण्डेय said...

दिल की करें...बहुत बढिया रचना :)

 

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