Monday, 9 July 2012

बारिश की बूँदें ...

(कुछ समय किसी कारणवश अनुपस्थित रही..आशा है आप सभी कलमदान से जुड़े रहेंगे ..)

कौन गली से आये हो तुम बदरा.

आज नैना मिलाये हो

 प्यासे इस तन मन पे बरबस रस की फुहार कर   जाए हो .

चन्द बुलबुलों से खेलता फिसलता पानी,
इठलाती झड़ियों में बारिश की करता मनमानी 

यूँ रिमझिम रुमझुम गुनगुनाता 

हथेलियों से निकल कर बाँहों में भरता पानी



रोकें कैसे इस मौसम में मस्त हुए जाते हैं 

इन घटाओं से बादलों से बुदबुदाते हैं 

सराबोर करती हैं ये मासूम झड़ियां

इस बरसात में हम खोये जाते हैं
















25 Comments:

At 9 July 2012 at 21:49 , Blogger अरूण साथी said...

साधु-साधु
अतिसुन्दर

 
At 9 July 2012 at 21:59 , Blogger RITU said...

आपका धन्यवाद

 
At 9 July 2012 at 22:16 , Blogger expression said...

बहुत सुन्दर रितु जी..

आप लिखते रहिये हम जुड़े रहेंगे..
शुभकामनाएं.

अनु

 
At 9 July 2012 at 22:39 , Blogger nirmal nirmal said...

बारिश के साथ, कल्पना की उड़ान, बहुत खूब।

 
At 9 July 2012 at 22:47 , Blogger रश्मि प्रभा... said...

सराबोर करती हैं ये मासूम झड़ियां..... कैसे कलमदान से दूर होंगे !

 
At 9 July 2012 at 22:48 , Blogger रश्मि प्रभा... said...

सराबोर करती हैं ये मासूम झड़ियां..... कैसे कलमदान से दूर होंगे !

 
At 9 July 2012 at 22:49 , Blogger रश्मि प्रभा... said...

सराबोर करती हैं ये मासूम झड़ियां..... कैसे कलमदान से दूर होंगे !

 
At 9 July 2012 at 23:17 , Blogger रविकर फैजाबादी said...

यह है बुधवार की खबर ।

उत्कृष्ट प्रस्तुति चर्चा मंच पर ।।



आइये-

सादर ।।

 
At 9 July 2012 at 23:52 , Blogger केवल राम : said...

बेहतर रचना ...!

 
At 10 July 2012 at 02:11 , Blogger संध्या शर्मा said...

बहुत सुन्दर बारिश से सराबोर रचना...

 
At 10 July 2012 at 02:49 , Blogger RITU said...

आप सभी ने 'कलमदान 'पर पधार कर कृतार्थ कर दिया ..अनेकानेक धन्यवाद ..!

 
At 10 July 2012 at 03:03 , Blogger सदा said...

वाह ... बेहतरीन
कल 11/07/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


'' अहा ! क्‍या तो बारिश है !! ''

 
At 10 July 2012 at 04:03 , Blogger दिगम्बर नासवा said...

वाह क्या बात है ... ये बरखा आती है तो खुद ब खुद गीत भी निकल आते हैं ..

 
At 10 July 2012 at 04:23 , Blogger वन्दना said...

सुन्दर प्रस्तुति।

 
At 10 July 2012 at 07:52 , Blogger प्रेम सरोवर said...

रोकें कैसे इस मौसम में मस्त हुए जाते हैं
इन घटाओं से बादलों से बुदबुदाते हैं
सराबोर करती हैं ये मासूम झड़ियां
इस बरसात में हम खोये जाते हैं।

बहुत ही मनभावन रचना। मेरे नए पोस्ट पर आपका निमंत्रण है। धन्यवाद।

 
At 10 July 2012 at 07:54 , Blogger प्रेम सरोवर said...

रोकें कैसे इस मौसम में मस्त हुए जाते हैं
इन घटाओं से बादलों से बुदबुदाते हैं
सराबोर करती हैं ये मासूम झड़ियां
इस बरसात में हम खोये जाते हैं।

बहुत ही मनभावन रचना। मेरे नए पोस्ट पर आपका निमंत्रण है। धन्यवाद।

 
At 10 July 2012 at 18:00 , Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

तन-मन को सुख दे रही, जल की नेह फुहार।
चौमासे में मिल रहा, सबको ये उपहार।।

 
At 11 July 2012 at 00:01 , Blogger यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बेहतरीन


सादर

 
At 11 July 2012 at 01:20 , Blogger अनुपमा पाठक said...

सुन्दर!

 
At 11 July 2012 at 06:31 , Blogger Dr. sandhya tiwari said...

bahut sundar rachna

 
At 11 July 2012 at 08:03 , Blogger Reena Maurya said...

सुन्दर सावनी फुहार लिए रचना:-)

 
At 11 July 2012 at 09:04 , Blogger Rajesh Kumari said...

बहुत सुन्दर कोमल एहसास से सराबोर रचना अतिसुन्दर

 
At 15 July 2012 at 23:39 , Blogger Rakesh Kumar said...

कलमदान पर देरी से आने के लिए माफ़ी चाहता हूँ.

आपकी मस्त फुहारों से खिंचा चला आया हूँ.

बाग बाग हो गया है मन 'बारिश की बूंदों' में भीग कर.

कलमदान की वर्षा 'RITU' मेरे ब्लॉग पर भी रिमझिम रिमझिम करती आये,बस यही इन्तजार है.

 
At 22 July 2012 at 00:28 , Blogger सुखदरशन सेखों said...

जैसे भीगी हो बारिश में !!

 
At 24 July 2012 at 06:44 , Blogger आशा जोगळेकर said...

ये कविता तो मानो भिगो ही गई बारिश में । बहुत बढिया ।

 

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