Thursday, 2 February 2012

सूरज न मुख करियो मेरी ओर बसंती हो जाऊँगी...

सूरज न मुख करियो मेरी ओर
बसंती हो जाऊँगी...
रंग बसंत ,राग बसंत ,रुत बसंत
बसंत ही में ढल जाऊँगी
फिर ओढ़ बसंती चुनरी
मन ही मन इठलाऊँगी
मुख पे बसंती झलक
मन में फूल बसंत खिलाऊँगी
बासंती उपवन से बाँध
गजरा सज जाऊँगी
फिर दूर खड़े तू तकना
मैं पास तेरे न आऊँगी
मैं ठहरी बासंती बसंत बसंती
तेरे संग क्यूँ आऊँगी ?
सूरज न मुख करियो मेरी ओर
बसंती हो जाऊँगी .
(तस्वीर गूगल से ली है )

27 comments:

  1. सूरज न मुख करियो मेरी ओर
    बसंती हो जाऊँगी ......bahut hi umda rachna hai Ritu ji....

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    1. धन्यवाद अवन्ती जी ..

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  2. सूरज न मुख करियो मेरी ओर
    बसंती हो जाऊँगी .
    वाह ...बहुत खूब ।

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  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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    1. धन्यवाद sanjay ji

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  5. बहुत सुंदर लाजबाब प्रस्तुती .
    MY NEW POST ...40,वीं वैवाहिक वर्षगाँठ-पर...

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    1. धन्यवाद..आपको शादी की ४० वी वर्षगाँठ की शुभकामनायें ..

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  6. रंग बसंत ,राग बसंत ,रुत बसंत
    बसंत ही में ढल जाऊँगी
    सुन्दर बसंती रचना...

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    1. धन्यवाद..sandhya ji

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  7. आपके स्नेहिल समर्थन का आभारी हूँ.
    बहुत सुन्दर सृजन, बधाई.

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  8. सुंदर रचना
    बेहतरीन प्रस्तुती ...

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    1. धन्यवाद..reena ji

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  9. Nice Blog , Plz Visit Me:- http://hindi4tech.blogspot.com ??? Follow If U Lke My BLog????

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    1. thanks. ..will definitely visit your blog..

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  10. सुन्दर और मोहक प्रस्तुति ।

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  11. ak achhi rachana ke liye abhar Ritu ji.

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  12. धन्यवाद..naveen ji

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  13. बहुत सुंदर, वासंतिक भाव लिए रचना

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