Tuesday, 24 January 2012

मिला कदम आ बढ़ चलें ..

राष्ट्र को 'गणतंत्र दिवस' पर समर्पित 

मिला कदम आ बढ़ चलें 
फासलों को हौसलों से जीत लें 
मिला कदम आ बढ़ चलें ...

मुट्ठियों को बाँध लें 
आ आज ये ठान लें  
धरा या गगन बनें 
मिला कदम आ बढ़ चलें ..

दिए जलायें रौशनी करें
गलत जहां सही करें 
क्या हो रहा ये जान लें 
मिला कदम आ बढ़ चलें ..

प्यार से ही जीत लें 
किसी से भी सीख लें 
पत्थर मील के बनें 
मिला कदम आ बढ़ चलें ..

न चुप रहे ,न मौन धरें 
बोलों में बल भरें 
राग की रागिनी बनें 
मिला कदम आ बढ़ चलें ...

13 comments:

  1. गणतन्त्र दिवस की अग्रिम बधाई।
    बहुत ही उत्साहवर्धक कविता।


    सादर

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  2. सुन्दर रचना एक नए रूप में!

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  3. kya bat hae aapko bhi gantantra ki shubhkamnayen

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  4. न चुप रहे ,न मौन धरें
    बोलों में बल भरें
    राग की रागिनी बनें
    मिला कदम आ बढ़ चलें ..... सुन्दर आह्वान

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  5. nice poem
    दिए जलायें रौशनी करें
    गलत जहां सही करें
    क्या हो रहा ये जान लें
    मिला कदम आ बढ़ चलें

    check my blog

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  6. प्यार से ही जीत लें
    किसी से भी सीख लें.VERY NICE.

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  7. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ।
    ----------------------------
    कल 26/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  8. उम्‍मीदों भरी सुंदर रचना।

    गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं....

    जय हिंद...वंदे मातरम्।

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  9. प्यार से ही जीत लें
    किसी से भी सीख लें
    पत्थर मील के बनें
    मिला कदम आ बढ़ चलें ..

    बहुत सुन्दर एवं प्रेरणादायी

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  10. प्यार से ही जीत लें
    किसी से भी सीख लें
    पत्थर मील के बनें
    मिला कदम आ बढ़ चलें ..
    बहूत अच्छी रचना है

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