Sunday, 22 January 2012

भंवरा

देखो भंवरा कर रहा पुष्पों संग रास 
ज्यू मधुकर को हो 'कृष्ण लीला ' का आभास 
सूर्य की किरणे सजा रहीं अद्भुत बेला 
सिन्दूरी आभा में ,संग बसंत वो खेला ..

पत्ता पत्ता डारी डारी गुनगुन करता जाए 
कानो में पुष्पों के जाने कौन राग सुनाये 
नाजुक 'पराग ' का ओढा उसने चोला 
हे ! बसंत तुमने कैसा इत्र है घोला ..

आते जाते रहना भँवरे ,मेरे मन उपवन में 
राह देखेगी हर कलि इस तन चितवन में 
क्यों हिचकोले खाए मन का ये हिंडोला 
ओ ! भँवरे ,तुम संग हुई बावरी ,द्वार ह्रदय का खोला

14 Comments:

At 22 January 2012 at 20:59 , Blogger रश्मि प्रभा... said...

मनमोहती रचना ...

 
At 22 January 2012 at 22:23 , Blogger S.N SHUKLA said...

बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

 
At 22 January 2012 at 22:24 , Blogger वन्दना said...

वाह अनुपम प्रस्तुति।

 
At 22 January 2012 at 23:47 , Blogger अनुपमा पाठक said...

सुन्दर!

 
At 23 January 2012 at 01:09 , Blogger डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"(Dr.Rajendra Tela,Nirantar)" said...

भँवरे
भंवरा उड़ रहा था,फूलों पर मंडरा रहा था
मंत्र मुग्ध करने वाला,गुंजन कर रहा था,

ललचाती हुई नज़रों से,शिकार दूंढ रहा था,
अपना बनाने की चाह मैं,फूलों को लुभा रहा था

एक फूल उसके जाल मैं,फँस गया
भँवरे की अदाओं ने,मोहित उसे कर दिया

उसने प्रणय निवेदन,स्वीकार कर लिया
भँवरे ने देर नहीं लगाईं,फूल से आलिंगनबद्ध हो गया

रसस्वादन करने लगा,फिर तृप्त हो उड़ गया
फूल को निर्जीव और असहाय छोड़ गया

भँवरे और फूल की कहानी तो पुरानी है,
बार बार कही जाती है,"निरंतर"दोहराई जाती है

भँवरे का सम्मोहन,फूलों को आमंत्रण
फिर उनका आलिंगन,बाद मैं क्रंदन

ऐ खुदा अब तो रहम फरमाओ
फूलों को ऐसे भंवरों से बचाओ....

15-08-2010

 
At 23 January 2012 at 01:17 , Blogger G.N.SHAW said...

भौरे और फूल की मिलन बहुत कुछ सन्देश देती -- यह कविता ! बधाई जी !

 
At 23 January 2012 at 01:56 , Blogger veerubhai said...

अनुभूति का विस्तृत फलक बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है इन काव्यात्मक पंक्तियों में .सुन्दर मनोहर .गेय.

 
At 23 January 2012 at 02:27 , Blogger NISHA MAHARANA said...

आते जाते रहना भँवरे ,मेरे मन उपवन में.waah.

 
At 23 January 2012 at 03:39 , Blogger sangita said...

sndar post hae aabhar....

 
At 23 January 2012 at 03:55 , Blogger Mukesh Kumar Sinha said...

ओ ! भँवरे ,तुम संग हुई बावरी ,द्वार ह्रदय का खोला ....

bahut pyari baat... pyari rachna...

 
At 23 January 2012 at 04:13 , Blogger दिगम्बर नासवा said...

भवरे तो बस रस की तलाश में रहते हैं ... अच्छी रचना है ...

 
At 23 January 2012 at 08:25 , Blogger संजय भास्कर said...

वाह!!!वाह!!! क्या कहने, बेहद उम्दा

मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
सभी के दिलों में हमेशा अमर रहेंगे महानायक - नेताजी सुभाषचन्द्र बोस

 
At 23 January 2012 at 11:01 , Blogger Atul Shrivastava said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट्स पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

 
At 24 January 2012 at 03:02 , Blogger रेखा said...

खूबसूरत प्रस्तुति ...

 

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