Saturday, 21 January 2012

रास

सुन्दर नयन पलकें घनी कारी कारी 
नाज़ुक बेल सी लिपटी मेरे ह्रदय की डारी 
नर्म चांदनी संग रात चांदी सी चमके 
आज करेंगे रास गोपीन संग ,कान्हा जी जमके 

सुमधुर लय में डोल उठेंगे ,किंकिन ,पायल, सारी
हर गोपी इतराए ,इठलाये ,जब आवे उसकी बारी 
लगा के लाली ,कानो में बाली ,नाचें वो बन बन के 
तुम भी बने सहस्र ,किसना सबके संग जा धमके 
इतनी शीतल इतनी सुन्दर ,मधुर रात वो कारी 
कितने पग हैं ,कितने नख हैं ,तुम विचित्र बनवारी
मैं भी नाचूं ,धिन ता ता ,धिन ता ता तारी 
अगर स्वप्ना भी है तो, बीत जाए उम्र यूही सारी

17 Comments:

At 21 January 2012 at 18:11 , Blogger संजय भास्कर said...

सुन्दर नयन पलकें घनी कारी कारी
नाज़ुक बेल सी लिपटी मेरे ह्रदय की डारी
....बेहद ख़ूबसूरत और उम्दा

 
At 21 January 2012 at 18:55 , Blogger संजय भास्कर said...

Ritu ji adbhut bhav ...........bahut sunder

 
At 21 January 2012 at 19:52 , Blogger देवांशु निगम said...

बहुत बढ़िया...

 
At 21 January 2012 at 22:15 , Blogger चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बढ़िया प्रस्तुति...
आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 23-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

 
At 21 January 2012 at 22:55 , Blogger S.N SHUKLA said...

ख़ूबसूरत प्रस्तुति, आभार.
please visit my blog.

 
At 22 January 2012 at 01:17 , Blogger sangita said...

manohari manbhavan kavya hae .mere blog men aapka svagat hae .

 
At 22 January 2012 at 02:12 , Blogger रश्मि प्रभा... said...

bhawon kee gagri ...

 
At 22 January 2012 at 02:16 , Blogger Naveen Mani Tripathi said...

Vah...... bahut sundar rachana badhai ke sath hi abhar.

 
At 22 January 2012 at 03:31 , Blogger दिगम्बर नासवा said...

सुमधुर लय में डोल उठेंगे ,किंकिन ,पायल, सारी
हर गोपी इतराए ,इठलाये ,जब आवे उसकी बारी ...

वाह कृष्ण के मोह में डूबी गोपियाँ ... कितना भाव संजोया है ... लाजवाब...

 
At 22 January 2012 at 07:26 , Blogger dheerendra said...

इतनी शीतल इतनी सुन्दर ,मधुर रात वो कारी
कितने पग हैं ,कितने नख हैं ,तुम विचित्र बनवारी
मैं भी नाचूं ,धिन ता ता ,धिन ता ता तारी
अगर स्वप्ना भी है तो, बीत जाए उम्र यूही सारी

बहुत सुंदर पंक्तियाँ अच्छी रचना ,......
welcome to my new post...kaavyaanjli

 
At 22 January 2012 at 10:21 , Blogger डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"(Dr.Rajendra Tela,Nirantar)" said...

kavitaa bhee sundar sheetal....

 
At 22 January 2012 at 12:39 , Blogger Atul Shrivastava said...

प्रेम में डूबी सुंदर रचना।

 
At 22 January 2012 at 18:47 , Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत उम्दा।

 
At 22 January 2012 at 21:33 , Blogger veerubhai said...

इतनी शीतल इतनी सुन्दर ,मधुर रात वो कारी
कितने पग हैं ,कितने नख हैं ,तुम विचित्र बनवारी
मैं भी नाचूं ,धिन ता ता ,धिन ता ता तारी
अगर स्वप्ना भी है तो, बीत जाए उम्र यूही सारी
काव्यात्मक सौन्दर्य और नाद से भर पूर रचना .

 
At 22 January 2012 at 22:31 , Blogger वन्दना said...

आह ! यही तो चाहत है…………बहुत मनोहारी चित्रण्।

 
At 22 January 2012 at 23:26 , Blogger vidya said...

सुन्दर...
भावमय प्रस्तुति...

 
At 23 January 2012 at 09:49 , Blogger Reena Maurya said...

बहूत सुंदर लिखा है चित्र भी बहूत मनभावन है ..

 

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