Monday, 16 January 2012

स्मृतियाँ ....

मुझे पता नहीं कब अश्क बहे और कब आँखों से वो सब कुछ धुल गया जो बेरौनक था ,ग़मगीन था ,उदास बैठे ,समझ नहीं आ रहा था की हम गुनेहगार हैं या ज़िन्दगी के विश्लेषण में हमने जो मुकाम चुने उनसे गुज़र कर जा रहे हैं..
थोड़े नमकीन हैं पर बह जाने पर मीठे लगते हैं..मनो एक चम्मच शक्कर घुल गयी हो जिस्म में ..ज़िन्दगी के कौर तोड़ते हुए शाक भाजी की तरह क्यों लिपट जाती है रुसवाईयाँ ..असर तो होता है ..फिर चाहे तिनके की तरह हो या फैली हुई चादर की तरह ..
मन के बोझिल बन ने में बस एक पल लगता है , स्मृतियाँ आ जाती हैं ..,फिर सुन्दर या बदसूरत ,एक बाई स्कोप में मानो तस्वीर घूम रही हो ...आ ही जाते हैं वो क्षण..
ज़रूरी तो नहीं की मन दुःख में ही बोझिल हो ,कभी कभी अतीत के हसीं सुन्दर लम्हे भी आज में खो जाने पर बड़े याद आते हैं ,...मन को बोझिल करते हैं..
चलो अच्छा ही है ..इस बहाने तफरी हो जाती है ...:)

13 Comments:

At 16 January 2012 at 21:36 , Blogger यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत सही।

सादर

 
At 16 January 2012 at 22:04 , Blogger Atul Shrivastava said...

यादें आने वाली जिंदगी का रास्‍ता भी बताती हैं और उसे जीने का सलीका भी सिखाती हैं।

 
At 16 January 2012 at 23:00 , Blogger रश्मि प्रभा... said...

ज़िन्दगी यूँ ही कभी जाने कभी अनजाने चलती जाती है

 
At 16 January 2012 at 23:43 , Blogger डा. श्याम गुप्त said...

पता नहीं कब अश्क बहे और कब आँखों से वो सब कुछ धुल गया जो बेरौनक था...
---सुन्दर ....इसीलिये बहते हैं आंसू...

 
At 17 January 2012 at 02:08 , Blogger सदा said...

बेहतरीन भाव संयोजन
कल 18/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, जिन्‍दगी की बातें ... !

धन्यवाद!

 
At 17 January 2012 at 02:24 , Blogger Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर..

 
At 17 January 2012 at 06:05 , Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

वाह!
बहुत बढ़िया!
अपनी सुविधा से लिए, चर्चा के दो वार।
चर्चा मंच सजाउँगा, मंगल और बुधवार।।
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

 
At 17 January 2012 at 19:03 , Blogger Amrita Tanmay said...

जीने के लिए खुबसूरत बहाना होना ही चाहिए..

 
At 17 January 2012 at 19:55 , Blogger Rajesh Kumari said...

bahut sundar bhaav chhipe hai ateet ki yaadon ki tarah.

 
At 17 January 2012 at 21:31 , Blogger संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरती से मन के भावों को अभिव्यक्त किया ..

 
At 17 January 2012 at 22:20 , Blogger संजय भास्कर said...

खूबसूरत रचना

 
At 17 January 2012 at 23:31 , Blogger vidya said...

बहुत सुन्दर...
यादों का आना-जाना-और कभी यूँ ही ठहर जाना...यही तो जिंदगी है...

 
At 18 January 2012 at 07:29 , Blogger Reena Maurya said...

खुबसूरत भावाभिव्यक्ति जरुरी नहीं की अतीत की यादे रुला ही दे , कुछ अच्छी बाते होती है जो मन को खुश भी करती है

 

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

Links to this post:

Create a Link

<< Home