Sunday, 2 December 2012

सर्दी की हवा ...







कौन कहता है इन रातों में बेखबर से सोये थे हम 
सर्द रातों में अलावों पर सेक रहे थे सपनों को 
सिहर उठती थी रूह जब पास से गुज़र जाती थीं तुम 
और भी उड़ जाती थी रंगत मेरी हथेलियों की 
तरसते थे पाने को एक कौना बिस्तरबंद का 
जब लहरा के पलट कर बल खा के तुम फिर आ जातीं थीं
(चित्र गूगल से )

7 comments:

  1. बहुत सुन्दर....
    ठिठुरते एहसास...
    :-)

    अनु

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  2. वाह गहन अभियक्ति बेहद उम्दा रचना बधाई स्वीकारें
    अरुन शर्मा
    www.arunsblog.in

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  3. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल 4/12/12को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका स्वागत है

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  4. शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन.
    बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी.बेह्तरीन अभिव्यक्ति!शुभकामनायें.
    आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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  5. उनका एहसास भी कितना कुछ कर जाता है ...

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  6. अनुपम भाव ... बेहतरीन प्रस्‍तुति

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