Sunday, 29 January 2012

पटरियां...

राहें बहुत रास्ते मगर ये पटरियां
ढूंढे इन्ही में जिंदगानी की वो गलियाँ
मुड़ी तुड़ी राहों से कोई गुज़रता नहीं
मिली तो बस बेमिली ,ज्यों पटरियां

किस्से बहुत कहानी मगर ये पटरियां
गुलज़ार इन्ही से ,बन के मिटी कई हस्तियाँ
किताब ज़िन्दगी की कोई खुद पढ़ता नहीं
गुज़र जाती बस गुज़र ,ज्यों पटरियां

करीब बहुत ,फासले मगर ये पटरियां
पास आने पर ही बढती हैं नजदीकियां
दिल से किसी को कोई तौलता नहीं
मिल के भी न मिटी दूरी ,ज्यों पटरियां

21 Comments:

At 29 January 2012 at 20:14 , Blogger dinesh aggarwal said...

सुन्दर अभिव्यक्ति....
क्या यही गणतंत्र है

 
At 29 January 2012 at 21:01 , Blogger अरूण साथी said...

मुड़ी तुड़ी राहों से कोई गुज़रता नहीं
मिली तो बस बेमिली ,ज्यों पटरियां

अतिसुन्दर

 
At 29 January 2012 at 22:03 , Blogger Amrita Tanmay said...

बहुत बहुत सुन्दर रचना ..अच्छी लगी .

 
At 29 January 2012 at 22:16 , Blogger डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"(Dr.Rajendra Tela,Nirantar)" said...

chaahe door raho yaa paas
nazdeekiyaan man kee hotee hein
achhee rachnaa

 
At 29 January 2012 at 23:27 , Blogger रश्मि प्रभा... said...

किस्से बहुत कहानी मगर ये पटरियां
गुलज़ार इन्ही से ,बन के मिटी कई हस्तियाँ
किताब ज़िन्दगी की कोई खुद पढ़ता नहीं
गुज़र जाती बस गुज़र ,ज्यों पटरियां... जाने कितना कुछ समेटती ये पटरियां

 
At 30 January 2012 at 01:38 , Blogger सदा said...

बहुत ही बढि़या।

 
At 30 January 2012 at 02:29 , Blogger चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

 
At 30 January 2012 at 02:30 , Blogger चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

 
At 30 January 2012 at 04:32 , Blogger यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बेहतरीन।


सादर

 
At 30 January 2012 at 06:03 , Blogger anju(anu) choudhary said...

हम सब की जिंदगी ...यूँ ही चलती हूँ इन पटरियों सी .....

 
At 30 January 2012 at 06:34 , Blogger S.N SHUKLA said...

आपके ब्लॉग पर पधारने , समर्थन और स्नेहाशीष प्रदान करने का आभारी हूँ.

बहुत सुन्दर सृजन , बधाई.

 
At 30 January 2012 at 06:40 , Blogger NISHA MAHARANA said...

करीब बहुत ,फासले मगर ये पटरियां
पास आने पर ही बढती हैं नजदीकियां.बेहतरीन.

 
At 30 January 2012 at 07:33 , Blogger sangita said...

बहुत ही बढि़या।
सुन्दर अभिव्यक्ति....
thanx ,samarthak banane ke liye .

 
At 30 January 2012 at 08:41 , Blogger Shanti Garg said...

बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

 
At 30 January 2012 at 11:21 , Blogger Atul Shrivastava said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

 
At 30 January 2012 at 20:49 , Blogger RITU said...

आज चर्चा मंच खुल ही नहीं रहा है...पता नहीं क्या गड़बड़ है..मुझको स्थान देने के लिए आभार..जैसे ही खुलेगा ,अवश्य पहुंचेंगे..

 
At 30 January 2012 at 22:58 , Blogger डा. श्याम गुप्त said...

राहें बहुत रास्ते मगर ये पटरियां........राहें व रास्ते दोनों समानर्थक हैं?
ढूंढे इन्ही में जिंदगानी की वो गलियाँ..... कौन ढूंढता है...?
मुड़ी तुड़ी राहों से कोई गुज़रता नहीं.......राहें चाहे जैसी हों गुजरना तो पडता ही है ?
मिली तो बस बेमिली ,ज्यों पटरियां।

---कुछ विचित्र से अस्पष्ट भाव व कथ्य हैं....

 
At 31 January 2012 at 02:07 , Blogger RITU said...

हाँ विचित्र होता है कवी का मन .., कभी कभी उसके लिए राहें और रास्तों में भी असमानता होती है ..मेरा तात्पर्य पटरियों की अलग अलग तरीके से तुलना करना था...
पहली चार लाइनों का अर्थ है ..
की राहें अर्थार्थ ज़िन्दगी में जीने के लिए प्रेरणास्रोत,.. तो बहुत हैं ,पर लोग उनपे यानी उन रास्तों पर चलते हैं कई बार बिलकुल बेमेल पटरियों की तरह ..अलग अलग..
फिर उन्ही में हम ज़िन्दगी का तात्पर्य ढूदते है ..सोचते हैं के चल तो रहे हैं..पर फिर भी क्यों जहां जाना है वहीँ नहीं पहुँच रहे..
मुड़ी तुड़ी राहों ..अर्थार्थ ,असामान्य परिस्थितियाँ ,परिश्रम वाली स्तिथ्तियों से बिरला ही लोग गुज़रते हैं ..
'मिली तो बस बेमिली '..का अर्थ है की किसी को मिल जाती हैं राहें यानी जीने का सच्चा अर्थ.. और किसी को मिल कर भी बेमिली हो जाती हैं ..शून्य हो जाती है और फिर वो पटरियों की तरह ही ज़िन्दगी गुजारता है ..साथ रह कर भी अलग ..
ज़रा कठिन है..
परन्तु सोच है अपनी अपनी ..
आपके विचारों ने मुझे प्रेरित किया ..आशा है आगे भी इसी तरह आप मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे..
ऋतू बंसल

 
At 31 January 2012 at 03:53 , Blogger नीरज गोस्वामी said...

किस्से बहुत कहानी मगर ये पटरियां
गुलज़ार इन्ही से ,बन के मिटी कई हस्तियाँ
किताब ज़िन्दगी की कोई खुद पढ़ता नहीं
गुज़र जाती बस गुज़र ,ज्यों पटरियां

क्या शब्द पिरोये हैं आपने अपनी रचना में भाई वाह...कमाल कर दिया

नीरज

 
At 31 January 2012 at 09:44 , Blogger sangita said...

क्या शब्द पिरोये हैं |

 
At 31 January 2012 at 14:19 , Blogger Savita said...

बहुत सुन्दर ख्याल और शब्द हैं।

 

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