Friday, 20 January 2012

पापा की कलम से..

मेरे पापा जी ,जो स्वयं एक प्रसिद्द कवी हैं ,मेरठ में ,ने जब मेरी कवितायें पढ़ी तो ये शब्द लिखे ..
आपके सामने प्रस्तुत करना चाहूंगी...

कैसे  करूँ तारीफ़ ,मुझे शब्दों की कमी खलती है 
जो देखता हूँ पढता हूँ एक ख्वाब सी लगती है 
ज्ञान की गंगा का उद्गम कभी आसान नहीं होता 
मुझो मेरी बेटी माँ शारदे सी लगती है ..

17 Comments:

At 20 January 2012 at 21:24 , Blogger रश्मि प्रभा... said...

इससे बड़ा और कोई आशीर्वाद नहीं ....

 
At 20 January 2012 at 21:32 , Blogger मनीष सिंह निराला said...

बहुत सुंदर !

 
At 20 January 2012 at 21:46 , Blogger यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

वाह!बहुत बहुत अच्छा लिखा है अंकल जी ने।
उनको मेरी सादर नमस्ते!



सादर

 
At 20 January 2012 at 22:02 , Blogger संजय भास्कर said...

मुझो मेरी बेटी माँ शारदे सी लगती है ..
इससे बड़ा और कोई आशीर्वाद नहीं
.. प्रणाम अंकल जी को

 
At 20 January 2012 at 22:04 , Blogger वन्दना said...

वाह बहुत सुन्दर उद्गार्…॥

 
At 21 January 2012 at 03:04 , Blogger सदा said...

बहुत ही अनुपम भाव लिए यह स्‍नेहाशीष ...आपके लेखन के लिए एक वरदान हैं ...

 
At 21 January 2012 at 05:05 , Blogger sangita said...

मेरी बेटी माँ शारदे सी लगती है,इससे बड़ा और कोई आशीर्वाद नहीं ...

 
At 21 January 2012 at 07:43 , Blogger Rakesh Kumar said...

पिता के भावुक उद्गारो को सादर नमन.
रितु जी आपमें माँ शारदा जरूर विराजमान होंगीं
और ब्लॉग जगत को आप अपनी कलम के दान से
जरूर जरूर रोशन करेंगीं.

 
At 21 January 2012 at 11:26 , Blogger RITU said...

सभी का ह्रदय से आभार ..
पापा को भी प्रेरित कर रही हूँ ब्लॉग बनाने के लिए ..उनके पास तो कविताओं का भण्डार है ..
मेरा मन है की ब्लॉग जगत के सदस्य भी उनके कलम से लिखे हुए शब्दों का आनंद लें ..देखिये कब कामयाब होती हूँ

 
At 21 January 2012 at 21:31 , Blogger चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बढ़िया प्रस्तुति...
आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 23-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

 
At 22 January 2012 at 06:25 , Blogger नीरज गोस्वामी said...

पिता द्वारा ऐसी प्रशंशा...इस से अधिक और क्या चाहिए जीवन में...वाह...

नीरज

 
At 22 January 2012 at 12:32 , Blogger Atul Shrivastava said...

पिता ने बेटी को जो दिया उससे बडा दुनिया में कुछ भी नहीं।
आप खुशनसीब हैं और आपके पिता को प्रणाम।

 
At 22 January 2012 at 17:24 , Blogger डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

Sunder Bhav...

 
At 22 January 2012 at 18:35 , Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बेटी की महिमा अनन्त है।
इससे ही घर में बसन्त है।।

 
At 22 January 2012 at 18:36 , Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

हेटी की महिना अनन्त है।
इनसे ही घर में बसन्त है।।

 
At 22 January 2012 at 20:55 , Blogger Naveen Mani Tripathi said...

ak pita ki sabse mahtvpoorn kamana yhi hoti hai .....vidushi Beti .....pita ki kamana poorn hone ki prteek hain ye panktiyan .......papa ko mere taraf se hardik badhai.

 
At 23 January 2012 at 08:38 , Blogger रचना दीक्षित said...

बहुत ही सुंदर. बधाई.

 

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