Tuesday, 17 January 2012

शब्द बोलते हैं..

कोरे कागज़ पे आज ,सिमटी जैसे रात ;
के शब्द बोलते हैं ...
गहरे हैं जज़्बात ,जो लिखदी ऐसी बात ;
के शब्द बोलते हैं ...
कुछ उत्तर कुछ प्रतुत्तर ,कुछ खाली हालात ;
के शब्द बोलते हैं..
कुछ मन की आवाज़ ,कुछ मेरी तेरी बात ;
के शब्द बोलते हैं ..
कुछ अमृतवाणी ,कुछ गीतों की सौगात ;
के शब्द बोलते हैं ..
कुछ छेड़खानी ,कुछ अश्कों की बरसात ;
के शब्द बोलते हैं ..
कुछ रंजोगम की जुबानी ,कुछ हंसी मुलाक़ात
के शब्द बोलते हैं ..
कुछ मैंने मन में ठानी ,हुई शब्दों से मुलाक़ात
के शब्द बोलते हैं...:)

15 comments:

  1. बेहतरीन बेहतरीन बेहतरीन
    क्या कहे शब्द नही है तारीफ के लिए ..

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    1. भास्कर जी ,तहे दिल से आभार..

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  2. शब्द ... बोलकर , ना बोलकर भी बोलते हैं

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  3. कुछ मैंने मन में ठानी ,हुई शब्दों से मुलाक़ात
    के शब्द बोलते हैं...:)
    बिल्‍कुल ...

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  4. बेहतरीन लयबध प्रस्तुति !

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  5. कुछ मन की आवाज़ ,कुछ मेरी तेरी बात ;
    के शब्द बोलते हैं ..

    बेहतरीन शब्द

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  6. कुछ छेड़खानी ,कुछ अश्कों की बरसात ;
    के शब्द बोलते हैं ..

    वाह...बेजोड़ रचना...बधाई

    नीरज

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  7. शब्द नही है तारीफ के लिए ..

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  8. आप सभी ने तारीफ कर ओत -प्रोत कर दिया है..मैं शुक्रगुज़ार हूँ..

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  9. bahut sundar likha, shabnd hi to bolate hain tabhi unake prabahv se hansi aur aansoon donon hi bikharte hain.

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  10. वाह!!!
    शब्‍द सच में बोलते हैं...
    गहरे भाव।
    सुंदर रचना।

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