Thursday, 29 December 2011

नदिया की बूँदें

हर बूँद जो नदिया संग चलती है नहीं पा लेती सागर को 
कुछ कमंडल  में साधू के ,तो कुछ अंजुली में तर्पण को 
कुछ चाहत बन कर अमृत की ,खो जाती अपनों ही में 
कुछ चढ़ती  चरणों में ,तो कुछ संतों की संगती में 


ख्वाइश होती हर इक बूँद की खो जाने को सागर में  
पर राह में कंटक बन छिटक जाती निर्मम वन में 
सूर्य की  किरणों में ज्यों सो जाती आलस्य में 
जहां  से चली थी पहुँच जाती  वहीँ दुर्भाग्य में 


बूंदों का क्या है , समझौते हैं  नदिया से
साथ चलकर करने मिलन दरिया से 
छिटकी हुई बूंदे भी भाग्य पर इठलायेंगी 
क्यूंकि नदिया की धारा तब 'खारी 'कहलायेंगी 



8 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......
    आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की शुभकामनाएं...........

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  2. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति……………आगत विगत का फ़ेर छोडें
    नव वर्ष का स्वागत कर लें
    फिर पुराने ढर्रे पर ज़िन्दगी चल ले
    चलो कुछ देर भरम मे जी लें

    सबको कुछ दुआयें दे दें
    सबकी कुछ दुआयें ले लें
    2011 को विदाई दे दें
    2012 का स्वागत कर लें

    कुछ पल तो वर्तमान मे जी लें
    कुछ रस्म अदायगी हम भी कर लें
    एक शाम 2012 के नाम कर दें
    आओ नववर्ष का स्वागत कर लें

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  3. बूंदों का क्या है , समझौते हैं नदिया से
    साथ चलकर करने मिलन दरिया से
    छिटकी हुई बूंदे भी भाग्य पर इठलायेंगी
    क्यूंकि नदिया की धारा तब 'खारी 'कहलायेंगी
    बहुत ही सुन्‍दर भावमय करते शब्‍दों का संगम
    नववर्ष की अनंत शुभकामनाएं ।

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  4. आप सभी का ह्रदय से धन्यवाद व आभार ..
    आप सभी को भी नए वर्ष की मंगलकामनायें ...

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