Sunday, 22 April 2012

दोहे ..








जग में रह कर हरी भजू ,जग से बैर न होए..

जैसे जग में जल भरे ,पीवे अमृत होए..

(चित्र गूगल से )

8 comments:

  1. सटीक प्रस्तुति ।
    बढ़िया ।

    शुभकामनाएं ।।

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  2. सुंदर अभिव्यक्ति..

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  3. बहुत सुंदर रचना...

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  4. मनभावन सुंदर दोहे,...

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...:गजल...

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  5. बढ़िया रचना!
    पृथ्वी दिवस की शुभकामनाएँ!

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  6. सुंदर..........
    बहुत सुंदर......

    अनु

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