Sunday, 22 April 2012

दोहे ..








जग में रह कर हरी भजू ,जग से बैर न होए..

जैसे जग में जल भरे ,पीवे अमृत होए..

(चित्र गूगल से )

8 Comments:

At 22 April 2012 at 02:39 , Blogger रविकर फैजाबादी said...

सटीक प्रस्तुति ।
बढ़िया ।

शुभकामनाएं ।।

 
At 22 April 2012 at 02:53 , Blogger sushma 'आहुति' said...

सुंदर अभिव्यक्ति..

 
At 22 April 2012 at 03:15 , Blogger udaya veer singh said...

बहुत सुंदर रचना...

 
At 22 April 2012 at 03:56 , Blogger रश्मि प्रभा... said...

आमीन

 
At 22 April 2012 at 04:11 , Blogger dheerendra said...

मनभावन सुंदर दोहे,...

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...:गजल...

 
At 22 April 2012 at 07:10 , Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बढ़िया रचना!
पृथ्वी दिवस की शुभकामनाएँ!

 
At 22 April 2012 at 10:18 , Blogger expression said...

सुंदर..........
बहुत सुंदर......

अनु

 
At 22 April 2012 at 11:40 , Blogger चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

sundar doha

 

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