Wednesday, 4 January 2012

उलझन

यादों के धूमिल पलछिन को 
वादों के गिनगिन उन दिन को 
प्यार भरे उन अफ्सानो को 
मैं भूलूँ  या न भूलूँ  


संग उनके बिखरे सपनों को 
कुछ गैरों  को कुछ अपनों को 
शत्रंजों की उन चालों को 
मैं खेलूँ या न खेलूँ 


 जो जब चाहा मौन रहा 
जिसने जब चाह 'गौण' कहा
उनके डगमग हिंडोलों में 
मैं झूलूँ  या न झूलूँ 


ऊंचा उड़ने की ख्वाइश है 
रब से कुछ फरमाइश हैं
इन्द्रधनुष ,गगन में उड़के
मैं छु लूं या न छु लूं 



दिल कहता है भर जायेंगी 

आशाएं अब घर आयेंगी 
मन की उन हसरतों को 
मैं पा लूं या न पा लूं ..
:)

11 Comments:

At 4 January 2012 at 22:07 , Blogger Mukesh Kumar Sinha said...

दिल कहता है भर जायेंगी
आशाएं अब घर आयेंगी
मन की उन हसरतों को
मैं पा लूं या न पा लूं ..

dil jhooth nhi kahta..
har aashayen puri hongi
nav-varsh ki shubhkmnayen...

 
At 5 January 2012 at 00:10 , Blogger Atul Shrivastava said...

गहरे जज्‍बात।
सुंदर भावाभिव्‍यक्ति।

 
At 5 January 2012 at 02:21 , Blogger NISHA MAHARANA said...

achchi abhivaykti.

 
At 5 January 2012 at 06:08 , Blogger नीरज गोस्वामी said...

अच्छे शब्द, गहरे भाव ...सार्थक रचना...बधाई

नव वर्ष की शुभ कामनाएं
नीरज

 
At 5 January 2012 at 06:38 , Blogger रश्मि प्रभा... said...

bahut hi achhi rachna ...

 
At 5 January 2012 at 06:42 , Blogger रेखा श्रीवास्तव said...

bahut sundar likha hai.

 
At 5 January 2012 at 07:55 , Blogger Naveen Mani Tripathi said...

जो जब चाहा मौन रहा
जिसने जब चाह 'गौण' कहा
उनके डगमग हिंडोलों में
मैं झूलूँ या न झूलूँ

bahut sundar abhivyakti .... badhai Ritu ji

 
At 6 January 2012 at 08:22 , Blogger कौशल किशोर said...

वाकई मनन से ज्यादा चलायमान कोई नहीं..
अच्छी अभिव्यक्ति.
मेरे ब्लॉग को पढने और जुड़ने के लिए क्लीक करें इस लिंक पर.
http://dilkikashmakash.blogspot.com/

 
At 6 January 2012 at 21:17 , Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर रचना!

 
At 7 January 2012 at 18:12 , Blogger संजय भास्कर said...

कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।

 
At 7 January 2012 at 21:07 , Blogger RITU said...

शब्दों की कमी सी पड़ जाती है आप सब का प्यार पाने के बाद..
सादर धन्यवाद..!

 

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