Wednesday, 21 December 2011

फूल है गेंदे का

लिपटी हों जैसे धुप की सहर्ष किरणे
और बंधा हो जैसे चोटी में प्यारा सा फुंदना 
ऐसा सुन्दर फूल है गेंदे का  


महकती डालियों पे नित डोले 
बसंती छठा में बसंत रंग घोले 
टेसू के फूलों से भी ज्यादा पीला 
ऐसा सुन्दर फूल है गेंदे का 


हजारी ,संतरी ,तितलिय और पीला 
देवों का प्रिय ,मनमोहक रंगीला 
सुन्दर उपवन ,बसंत बना नशीला 
ऐसा सुन्दर फूल है गेंदे का..

7 Comments:

At 21 December 2011 at 07:42 , Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

वाह!
बहुत बढ़िया!
--
आपकी प्रवि्ष्टी की चर्चा कल बृहस्पतिवार 22-12-2011 के चर्चा मंच पर भी की या रही है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

 
At 21 December 2011 at 08:30 , Blogger Atul Shrivastava said...

गेंदे के फूल का सुंदर प्रस्‍तुतिकरण।
इस मौसम में गेंदा वैसे भी अपने पूरे निखार पर होता है.....

 
At 21 December 2011 at 19:07 , Blogger ऋता शेखर 'मधु' said...

गेंदे के फूल जैसी सुन्दर और सुवासित रचना...

 
At 21 December 2011 at 20:33 , Blogger RITU said...

आप सभी का तहे दिल से आभार ,व चर्चा मंच पर मुझे अवसर देने के लिए भी अनेकानेक धन्यवाद..
ऋतू बंसल

 
At 21 December 2011 at 23:11 , Blogger वन्दना said...

गेंदे के फ़ूल का बहुत सुन्दर चित्रण किया है।

 
At 22 December 2011 at 03:29 , Blogger S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

बहुत खूब....
सुन्दर रचना...
सादर.......

 
At 22 December 2011 at 04:49 , Blogger RITU said...

आप सभी का ह्रदय से धन्यवाद ,मेरी अन्य कविताओं पर भी नज़र डालें..

 

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