Friday, 16 December 2011

यादें

कुछ बाँधी पुड़ियों में हैं ,कुछ जेबों में भर ली हैं ,
कुछ पन्नों में रख ली हैं ,कुछ जज़बातों में भर ली हैं


कुछ में शक्कर सी घुली है , कुछ आटे सी गुंध  रही  हैं ,
कुछ माचिस सी जलीं हैं ,कुछ कपूर सी सुगंध रहीं हैं


कुछ तकिये सी कोमल  हैं कुछ लिहाफ़ सी ओढ़ रखी  हैं
कुछ बिस्तरबंद संग बंधी हैं ,कुछ अभी भी वहीँ पड़ी हैं


ये यादें हैं अनजानी सी ,पर जानी कुछ पहचानी सी ,
कुछ बेबस ग़मों में लिपटी ,कुछ रंगों की मनमानी सी


ये कल से कल की मुलाकातें हैं ,कुछ मेरी कुछ तेरी सी
कुछ सुलझे अनसुलझे प्रश्न ,कुछ रैन सवेरे सी..


2 Comments:

At 22 December 2011 at 23:55 , Blogger संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

 
At 21 March 2013 at 11:10 , Blogger savita tyagi said...

Very nice. Enjoyed it.

Savita Auntie.

 

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