Wednesday, 16 January 2013

आँसू छलक आये ...










गैर ज़माने पे कोई मुकम्मल असर न हुआ ..हादसे होते रहे ...इलज़ाम लगते रहे ..
इंसानों की भीड़ में हर शक्स अक्स से हुआ जुदा ..
न देखा उसने अपनाप को न पढ़ा तेरा चेहरा ..के लोग चले गए ..
मांगते रहे बस एक सवेरा ...

R.I.P. -Damini-Nirbhaya ! 16-01-2013




(चित्र वेबसाइट से )

3 Comments:

At 16 January 2013 at 09:03 , Blogger धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

वोट बैंक पर देश न बेचो ,अब तो कुछ अस्मत की सोचो
बहुत सह लिया अब न सहेंगें ,जल्द सख्त क़ानून चाहिए,,,,,

recent post: मातृभूमि,

 
At 16 January 2013 at 22:57 , Blogger Vinay Prajapati said...

अति सुंदर कृति
---
नवीनतम प्रविष्टी: गुलाबी कोंपलें

 
At 19 January 2013 at 07:22 , Blogger शिवनाथ कुमार said...

सही कहा आपने
बस कुछ दिनों के लिए लोगों का आक्रोश दिखता है उसके बाद शांत ,,,,,
फिर से एक दामिनी जब तक नहीं चढ़ती भेंट ....
दुखदायी स्थिति ,,,

 

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