Wednesday, 2 November 2016

तुम वो नहीं




तुम वो नहीं जो तुम हो ,
तुम वो हो जो दिख रहे हो 
तुम खुद भी न समझ पाओगे क्या हो 
न समझा पाओगे की क्या हो ,
पर बन जाओगे वो जो दिख रहे हो तुम ..

तुम्हारी रहमत हो या खुदगर्ज़ी
तुम्हारे अंदाज़े हो या तुम्हारी मर्ज़ी ,
खुद को  फिक्रज़दा ही पाओगे 
क्यूंकि ,जो तुम हो वो न दिख पाओगे 

करते रहो चाहे प्यार ,या करते रहो इंतज़ार 
तुम से मिलेंगे वही लोग बार बार ,
जिनसे तुम खुल न पाओगे 
तुम नहीं दिख सकोगे वो 
जो तुम दिखना चाहोगे 
लाख करो कोशिशें 
तुम वो हो जो दूसरों को  दिख जाओगे 

(चित्र गूगल से आभार )

14 comments:

  1. Bahut accha likha hai aapne ritu

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  2. कई बार ऐसा होता है इंसान दिखाना जो चाहता है वो होता नहीं ... पर वैसा दिख जाता है ... बहुत खूब लिखा है ...

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "व्हाट्सएप्प राशिफल - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. बहुत धन्यवाद !

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  4. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 04 नवम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. ज़रूर !! आभार आपका !

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  5. सुन्दर शब्द रचना.............
    http://savanxxx.blogspot.in

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    1. आपका धन्यवाद !!

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  6. कम शब्दों में बड़ी बड़ी बातें लिखना भी एक कला है

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