Wednesday, 16 December 2015

यूँ तुम से बिछड़ कर हम ....




(चित्र गूगल से साभार )

यूँ तुम से बिछड़ के हम रह नहीं पाते हैं 
कैसे कहें कुछ कह नहीं पाते हैं ..
ये उम्र यूँ ही कट रही है ..
कुछ है जो हम सह नहीं पाते हैं 
यूँ तुम से बिछड़ कर हम रह नहीं पाते हैं ..

अनजाना सा लगता ये शेहर है ..
अनजाने से लगते सब नाते हैं ..
हम मन ही मन में घबराते हैं 
यूँ तुम से बिछड़ के हम रह नहीं पाते हैं 

न सोचा था तुमने .न सोचा था हमने 
कैसे बने हैं  बंधन कैसे नाते हैं ..
न रातें कटती हैं ..न दिन काटे जाते हैं 
यूँ तुमसे बिछड़ के हम रह नहीं पाते हैं ..

कभी कुछ कहना होता है तुमसे  ,
कभी  कभी की कुछ ऐसी बातें हैं
जो न खुदी सुनते हैं न सुना पाते हैं 
यूँ तुमसे बिछड़ कर हम रह नहीं पाते हैं  



3 Comments:

At 17 December 2015 at 02:39 , Blogger yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 18 दिसम्बर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

 
At 17 December 2015 at 06:31 , Blogger कविता रावत said...

बहुत सुन्दर ..

 
At 3 March 2016 at 04:13 , Blogger RITU BANSAL said...

धन्यवाद ..!

 

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