Friday, 27 November 2015

तुम ही हो ...






(चित्र गूगल से साभार )

मेरा  साथ तुम ही  हो ,मेरे पास तुम ही हो 
कुछ इस कदर ,दरबदर ...बेशुमर 
मेरे ख्वाब तुम ही  हो ..मेरी बात तुम ही हो 
जैसे  बेखबर , रहबर ..इकरर 
मेरी सांस  तुम ही हो ,मेरी आस तुम ही हो ..
ए  हमसफ़र ,दिलबर ,रहगुज़र 
मेरी चाह तुम ही हो ,मेरी राह तुम ही हो 
देखूं दिन भर ,भर भर ,उम्र भर ..



2 Comments:

At 28 November 2015 at 02:49 , Blogger रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (29-11-2015) को "मैला हुआ है आवरण" (चर्चा-अंक 2175) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

 
At 1 December 2015 at 19:22 , Blogger RITU said...

धन्यवाद रूपचंद्र जी . ..सादर !

 

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