Friday, 31 July 2015

बात इतनी सी है ...


(चित्र गूगल से साभार )

कुछ कही न गयी जों ,कुछ बातें हैं वो  बतानी 
बात इतनी सी है 
कुछ शाम कुछ कहानी ,बात इतनी सी है 
मुझे फर्क नहीं कुछ ,बदल भी जाओ जो  तुम 
मुझे याद हैं वो निशानी ,बात इतनी सी है  
नहीं भूलेगा कभी , की कभी की थी बड़ी मनमानी 
बात इतनी सी है 
कभी शब्द तो कभी सिर्फ पानी ,बात इतनी सी है ...




3 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (02-08-2015) को "आशाएँ विश्वास जगाती" {चर्चा अंक-2055} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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