Thursday, 3 November 2016

......करते थे ....!!





एक घूँट ज़रा पी ले वो चाशनी जैसा घोल...
 जो भरा है इश्क भरे उन लम्हों से , 
जिन्हें फुर्सत भरे पलों में हम गुनगुनाया करते थे ..
बेख़ौफ़ गुज़रते हुए वक्त को हथेलियों में रख कर अंजुली  बना कर पी जाया करते थे ...
सुनहरी धूप  के तिलस्मी आगोश को ,
शुष्क सरसराती हवाओं के साथ चिलमन बना कर..
 ओढ़ ले जाया करते थे....
 शबनमी रातों को ,मुकम्मल तराशी हुई चाहतों से बने पलों को ..
देख कर इतराया करते थे ...
वो हज्जूम हो गया है खयालातों का ,जिन को सलाइयों में पिरो कर ....
बना  लिया करते थे ..एक लिहाफ सा  ,सो जाया करते थे... ...
बातचीतों के दौर में ,सिर्फ सुनते सुनते ही ,कब खो जाया करते थे ...
मुअस्सर हो वो दिन ,के चली आये खुद ही ,ज़िन्दगी ...
जिसे खुद ही ,कहीं छोड़ आया करते थे ...
मालूम नहीं कब जागे ,उन सपनों से ,जिन्हें देखने हम कोने तक जाया करते थे ...

(चित्र गूगल से साभार )



4 Comments:

At 7 November 2016 at 05:46 , Blogger संजय भास्‍कर said...

इतनी कोमल कविता और इतने नाज़ुक भाव

 
At 8 November 2016 at 04:00 , Blogger Digamber Naswa said...

kuch khwaabob ki baaten ... sote huye ya jaagte huye ...

 
At 15 November 2016 at 01:40 , Blogger RITU BANSAL said...

भावों का क्या है ...
मेरे ब्लॉग पर पधारने के लिए धन्यवाद ..!!

 
At 15 November 2016 at 01:41 , Blogger RITU BANSAL said...

ख्वाब ख्वाब ही होता है, कभी खुली आँखों से , कभी बंद ...
मेरे ब्लॉग पर पधारने के लिए धन्यवाद आपका ..

 

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